चेतना विज्ञान
(Science of Consciousness)
जीवन तो मात्र स्थूल शरीर, विचारों और क्रिआओं द्वारा बंधा हुआ है।
• जिस प्रकार से पेड़ की जड़ें- जमीन, खाद और पानी से (SAP)ले कर पेड़ के हर अंग को हरा भरा करने में सक्षम है:
उसी प्रकार से हमारा मन, अद्वैत जगत में विचरण के अभ्यास द्वारा अत्यंत सूक्ष्म ऊर्जा को अपने में पिरो कर -
• उस जीवनी शक्ति द्वारा बुद्धि को,
• स्नायु संस्थान द्वारा शरीर को
• और स्थूल संसार में भ्रमण द्वारा क्रिया जगत को
वर्गीकृत करने मे सक्षम है। यह भावातीत ध्यान के माध्यम से प्रकाशित आनंद में ओतप्रोत मन इस जीवन को पूर्णत्या संतुष्टि दे कर समस्त क्रिआओं को सफल बनाता है। अतः ऐसा चेतन्य मन ही इस जीवात्मा के उत्थान द्वारा समन्वित विकास की कुंजी है।